कामरत्न तन्त्र:

अथ स्तनवर्द्धन स्तनोत्थापनं च मातङ्गकृष्णाप्यथवाजगन्धावचायुता पर्युषिताम्बुमिश्रा । हयारिपत्नी नवनीत योगात्कुर्वन्ति पीनं कुचकुम्भयुग्मम् ।। ५५ ।। स्तनवर्धन तथा उत्थापन: गजपीपल, असगन्ध और वच इन सब को मिलाकर भैंस के मक्खन के साथ कुचों पर लगाने से यह शिघ्र दोनों स्तनों को कुम्भ के समान दृढ करता है ।

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Maharshi Shri Radheye
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